रमजान का पाक महीना केवल उपवास व प्रार्थना का ही नहीं साम्प्रदायिक सदभाव का भी अवसर प्रदान करता है

डॉ. रूबी खान इस्लाम में सबसे पवित्र महीना रमज़ान सिर्फ़ उपवास और प्रार्थना का समय नहीं है, बल्कि यह सांप्रदायिक सद्भाव, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और साझा सांस्कृतिक विरासत के आदर्शों को खूबसूरती से दर्शाता है। दुनिया भर में लाखों मुसलमान इस पवित्र महीने में अपने धार्मिक कर्तव्यों का निर्वहण करते हैं। इस महीने में एकजुटता, करुणा और आपसी सम्मान की भावना धार्मिक और सांस्कृतिक सीमा को पार कर जाती है। इससे दुनियाभर में नए प्रकार की एकता और समझ विकसित होती है। रमज़ान मुख्य रूप से आत्म-अनुशासन, भक्ति और आध्यात्मिक विकास का समय है। सुबह से शाम तक उपवास करने से वंचितों के प्रति सहानुभूति बढ़ती है। दान और उदारता के मूल्यों को बल मिलता है। परिवार, पड़ोसियों और यहाँ तक कि अजनबियों के साथ इफ्तार साझा करने का कार्य सामाजिक बंधन और सद्भाव को मजबूत करता है। इससे एक ऐसे माहौल का निर्माण होता है जो समाज में नयी उर्जा व समावेशिता पैदा करता है। रमज़ान के दौरान ज़कात (दान) का अभ्यास सामाजिक एकजुटता को और बढ़ावा देता है। लोग धार्मिक संबद्धता की परवाह किए बिना ज़रूरतमंदों की भलाई में योगदान देते हैं। कम भाग...