Posts

Showing posts with the label Mowati terroisam

माओवादी आन्दोलन का जातिवादी चेहरा उजागर, खूनी संघर्ष की आशंका

Image
गौतम चौधरी  भारत में सक्रिय चरमपंथी भूमिगत साम्यवादी संगठन, भारत की काम्यनिस्ट पार्टी (माअवादी) के राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व गतिरोध और अंतरद्वंद्व की खबर तो यदा-कदा आती रहती है लेकिन इन दिनों माओवादी आतंकवाद से बुरी तरह प्रभावित झारखंड के नेतृत्व में फूट की खबर डर पैदा करने वाली है। सूत्रों की मानें तो माओवादी पार्टी की राजनीतिक इकाई और मिलिट्री विंग दोनों आदिवासी और गैर आदिवासी गुटों में बंट गए हैं। आदिवासी गुट का नेतृत्व बुधेश्वर उरांव कर रहे हैं तो गैर आदिवासी गुट का नेतृत्व संदीप यादव के जिम्मे है। जगह-जगह दोनों गुटों के बीच विवाद की बात सामने आई है। सशस्त्र दस्तों में भी लगातार विभाजन की खाई गहरी होती जा रही है। इस गतिरोध को खूनी संघर्ष में बदलने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। डर दोनों तरफ है। माओवादियों नेतृत्व में डर इस बात को लेकर है कि इससे उच्च स्तर के गुरिल्ला प्रशिक्षण प्राप्त माओवादी लड़ाके आत्मसर्मपण कर सकते हैं तो दूसरी ओर पुलिस को इस बात की चिंता है कि इस लड़ाई में नाहक बेकशूर लोग मारे जाएंगे। मसलन इस बात को लेकर दोनों ओर से काउंटर की रणनीति बनने ल...

जेहादियों के सामान ही खतरनाक हँ मओबाद - गौतम चौधरी

उडीसा में चरम वामपथियों ने नल्को बाक्साईड खादान पर आक्रमण कर 14 औद्योगिक सुरक्षा गार्ड के जवानों को मौत के घाट उतार दिया। बिहार और झारखंड में कम से कम 02 सुरक्षा कर्मियों को नक्सली हिंसा का शिकार होना पडा है। 15 वीं लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण में माओवादी उत्पात के कारण कम से कम 12 सुरक्षाकर्मियों सहित 18 लोगों की मौत हो गयी। माओवादियों ने आम चुनाव वहिष्कार की घोषणा की थी। छतीसगढ में सलवाजुडूम के प्रभावशाली नेता के भाई की हत्या कर दी गयी। कुल मिलाकर देखा जाये तो इस्लामी जेहादी आतंकवाद के समानांतर ही वामपंथी चरमपंथी देश और समाज को क्षति पहुंचा रहे हैं। बावजूद इसके वाम चरमपंथियों पर न तो सरकार शख्त है और न ही भारत का समाचार जगत ही यह मानने को तैयार है कि नक्सली हिंसा भी आतंकवाद के दायरे में आता है। यह ठीक नहीं है और आने वाले समय में देश की संप्रभुता के लिए यह सबसे बडी चुनौती साबित होने वाली है। विगत दिनों मीडिया जगत में आतंकवाद ...