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हेमंत शासन का एक साल, इश्तिहारों के जश्न में जमीनी हकीकत की मीमांसा

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Gautam Chaudhary हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन की झारखंड सरकार ने अभी हाल ही में एक वर्ष पूरा किया है। अपने वर्षगांठ के मौके पर सरकार ने छोटा-सा जश्न भी मनाया। स्वाभाविक  रूप से जश्न बनता भी है। इस मौके पर सरकार के मुखिया ने बड़े जोरदार तरीके से आपनी पीठ थपथपाई और अपने द्वारा एक साल में किए गए कार्यों को लोगों के सामने रखा। उपलब्धियों के निक्षेप बड़े-बड़े होर्डिंग-इश्तिहारों के रूप में आपको पूरे प्रदेश भर में दिखेंगे। सड़कों पर, सार्वजनिक स्थानों पर, मसलन चैक-चैराहों पर लगे होर्डिंगों में सरकार ने अपनी एक साल की उपलब्धियों को मुकम्मल तरीके से स्थान दिलवाने की कोशिश की है। जिन उपलब्धियों की सरकारी अपने प्रचारों में जगह दी है, उसमें से अधिकतर का जमीन पर कोई वजूद नहीं दिखता लेकिन इससे सरकार की उपलब्धियां कम नहीं होती है।  वैसे किसी सरकार के लिए एक साल का समय कोई ज्यादा नहीं होता है और तरंत इसकी समीक्षा करना भी ठीक नहीं है लेकिन जब सरकार खुद अपनी ओर से इश्तेहार दे रही है तो समीक्षा करना स्वाभाविक हो जाता है। इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि हेमंत की सरकार ने कोविड-19 जैसी वैश्व...

बिहार में इन 10 कारणों से प्रभावी और अपरिहार्य बने हुए हैं नीतीश कुमार

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गौतम चौधरी नीतीश कुमार एक बार फिर से अजेय और अपरिहार्य होकर उभरे हैं। नीतीश के बारे में यही कहा जाता है कि वे चुनौतियों को अवसर में बदलने वाले नेताओं में से हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थिति में अपने आप को खड़ा किया है। लालू यादव के पराभव के बाद बिहार में दो ताकतों का उदय हुआ, जिसमें से एक नीतीश कुमार हैं और दूसरे रामविलास पासवान। रामविलास की विरासत बहुत ज्यादा मजबूत नहीं हो पायी लेकिन अपनी चतुराई और राजनीतिक कौषल के बदौलत नीतीश कुमार बिहार की राजनीति को अपने चारो तरफ नचाते रहे हैं। आइए जानते हैं नीतीश कुमार की मजबूती के 10 कारण: - पहला, नीतीश कुमार में विकास को मुद्दा बनाने वाले नेता की छवि है। जेडी (यू) और नीतीश कुमार बिहार में अभी भी एक बड़ी ताकत हैं और उनको दरकिनार कर किसी के लिए भी सरकार चलाना आसान नहीं है। यही वजह है कि कोई जोखिम लिए बगैर बीजेपी ने भी नीतीश को ही एनडीए का नेता मानकर चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव परिणाम में आधे के आसपास सीट रहने के बाद भी भाजपा नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाई। इससे यह साबित हो गया है कि नीतीष कुमार बिहार की राजनीति के लिए अपरिहार्य हैं। पिछले कुछ ...

सरना धर्म कोड पर भाजपा की रहस्यमय चुप्पी से उठ रहे कई सवाल

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गौतम चौधरी आगामी जनगणना में आदि वासियों के लिए सरना धर्म कोड की वकालत राज्य में बड़ा मुद्दा बनना जा रहा है। राज्य की महागठबंधन सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस बाबत प्रस्ताव पास करा दिया है। इस प्रस्ताव को अब केंद्र को भेजने की तैयारी हो रही है। विपक्ष में बैठी भाजपा और आजसू की भी इसमें सहमति है। इस पूरे मामले का अहम पक्ष यह है कि इस प्रस्ताव पर विशेष सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने रहस्यमय तरीके से चुप्पी साधे रखी। भाजपा के विधायकों ने सरकार के पक्ष का समर्थन कर दिया और प्रस्ताव पर बहस कराने की भी मांग नहीं की। सवाल यह उठता है कि आखिर भाजपा अपने पारंपरिक नीति से समझौता क्यों कर रही है। क्या भाजपा डरी हुई है , या फिर सरना धर्म कोड पर भाजपा की चुप्पी के और कारण हैं ? इसकी मिमांशा जरूरी है। बता दें कि इस मामले में भाजपा की अलग राय रही है। भाजपा लगातार से यह सवाल पूछती रही है कि जब पहले से जनसंख्या में यह व्यवस्था लागू थी तो 1961 में उसे हटाया क्यों ? भाजपा यह भी कहती रही है कि क्या धर्मातरित आदि वासियों को इससे इतर रखा जाएगा ? ये तमाम सवाल भारतीय जनता पार्टी की नीतिगत चिंतन म...

उपचुनाव : हेमंत के लिए कितनी चुनौती खड़ी कर पाएगी गुटों में बंटी प्रदेश भाजपा

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गौतम चौधरी  भाजपा नेतृत्व की ओर से बार-बार दावा किया जा रहा है कि बेरमो और दुमका उपचुनाव में उनकी जीत सूनिश्चित है, परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है। ऐसा लग रहा था कि इस उपचुनाव में महागठबंधन के उम्मीदवारों को हेमंत सरकार की असफलताओं और भाजपा के मजबूत संगठन से टकराना पड़ेगा लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा है। मसलन, प्रदेश सरकार की असफलताओं को केन्द्र सरकार की असफलताओं ने ढ़क दिया है और भाजपा के स्थानीय नेतृत्व का अंतरविरोध हेमंत के लिए संजीवनी का काम करने लगा है। खेमों में बटा प्रदेश का भाजपा नेतृत्व न तो हेमंत सरकार के खामियों को उजागर करने में सफल हो रहा है और न ही कोई आन्दोलन ही खड़ा कर पा रहा है। आगामी 03 नवम्बर को झारखंड की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। बेरमो विधानसभा की सीट कांग्रेस के कद्दावर नेता, राजेन्द्र सिंह की मृत्यु के बाद खाली हुई थी, जबकि दुमका की सीट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वेच्छा से छोड़ी है। यह उपचुनाव कई मायने में महत्वपूर्ण है। सबसे पहली बात तो यह है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश की यह पहली अग्नि परीक्षा है। दूसरी बात, इन दोनों विधानस...

NDA गठबंधन में दरार के कई मायने, LJP ने बिहार की सियासी जंग को बनाया रोचक

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गौतम चौधरी  चुनाव आयोग की घोषणा के बाद बिहार विधानसभा चुनाव का जमीनी जंग प्रारंभ हो गया है। दो महागठबंधनों ने भी लगभग अपनी-अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। एक ओर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन तो दूसरी ओर महागठबंधन अपने-अपने साथी पार्टियों के साथ चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। सीटों को लेकर जो गतिरोध था वह लगभग समाप्त हो चुका है। इस बार वाला बिहार का सियासी जंग इसलिए थोड़ा भिन्न है क्योंकि बहुत दिनों के बाद राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर एकिकृत वामदल चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले वाम पार्टियों का कोई न कोई धरा अपनी मनमानी करता रहा है लेकिन इस बार का बिहार विधानसभा चुनाव वाम गठबंधन की प्रयोगशाला के रूप में उभरकर सामने आया है। वाम दल आगे कितने संगठित रहेंगे यह तो भविष्य बताएगा लेकिन इस बार बिहार चुनाव में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्सवादी-लेनिनवादी से लेकिर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तक इकट्ठे चुनाव लड़ने को मजबूर हैं। मसलन इस बार का बिहार विधानसभा चुनाव वाम दलों के लिए एक प्रयोग है।   यह चुनाव इसलिए भी थोड़ा भिन्न है कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन के पुराने साथी लोक जनशक्ति पार्टी ...

बिहार विधानसभा चुनाव के साथ जुड़ी है झारखंड की भावी राजनीति, कभी भी हो सकती है घोषणा

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गौतम चौधरी @ वर्तमान बिहार विधानसभा का कार्यकाल पूरा हो रहा है। आगामी दिनों में बिहार विधानसभा का चुनाव होना अब लगभग तय हो गया है। बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही संभवतः झारखंड के दो खाली पड़े विधानसभा का भी उपचुनाव संपन्न कराया जाएगा और इसके परिणाम के बाद शर्तीया तौर पर झारखंड की राजनीति एक बार फिर से करवट लेगी। कोविड संक्रमण काल में भी चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में संलग्न है। सारे सरकारी महकमों को इस काम में लगाया गया है। इधर जो खबर आ रही है उससे अब यह लगने लगा है कि बिहार विधानसभा और झारखंड के दो विधानसभाओं का उपचुनाव 26 अक्टूबर. से लेकर 10 नवंबर के बीच करा लिया जाएगा।  चुनाव आयोग ने इस बात के संकेत भी दे दिए हैं। इसलिए अब कभी भी बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा हो सकती है। झारखंड में विधानसभा की दो खाली सीटों दुमका और बेरमो उपचुनाव के मतदान 26 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच कराने की तैयारी की जा रही है। चुनाव आयोग ने इसके संकेत दिए हैं। इस हिसाब से हफ्ते भर बाद कभी भी उपचुनाव के तारीखों की घोषणा हो सकती है। यह घोषणा बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही होगी। दुमका सीट मुख...

हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था……

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कुमार कौशलेन्द्र कौशल  शेष तो आप सब को पता ही होगा. बड़ी शोहरत नसीब पंक्तियाँ हैं.कई फिल्मों में नायक के मुंह से, शेरो-शायरी की महफ़िल में और नेता श्रेष्ठ के मुखारविंद से आप भी सुन ही चुके होंगे.  फिलहाल उपरोक्त पंक्तियों से बेबाक आरंभ के कारण पर आ जाता हूँ. सूबे झारखंड में पूर्व में सत्तारूढ़ रही रघुबर दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार और भारतीय जनता पार्टी की झारखंड इकाई में फिलहाल उपरोक्त पंक्तियों को चरितार्थ करते नेताओं की गतिविधि बढ़ गई है. शीघ्र ही सियासी हनीट्रैप की कोई नई खबर सुर्खियां बटोरने लगे तो आश्चर्य मत कीजियेगा! हनीट्रैप के साथ-साथ दोस्ताना और शुभमंगल ज्यादा सावधान जैसी फिल्म की नवीन पठकथा उजागर हो तो भी आश्चर्य मत कीजियेगा! विनती है कि मुझे वर्तमान हेमंत सरकार के प्रशस्ति गायक के विशेषण से विभूषित करने से पूर्व पूरा बेबाक पढ़ जरूर लीजियेगा. भूमिका हो गयी. चलिये अब आते हैं मूल मुद्दे “हनीट्रैप की सियासी क्रोनोलोजी… ” पर. देश की बात फिर कभी, फिलहाल सूबे झारखंड की बात कर लेते हैं. पिछले दिनों गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सो...

झारखंड में आम आदमी के लिए अलग और खास नेताओं के लिए अलग है कानून

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गौतम चौधरी  कोविड 19 महामारी के दौरान लाॅकडाउन प्रथम चरण से ही झारखंड में कानून और नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। आए दिन समाचार के हर माध्यमों में बड़ी-बड़ी खबरें प्रसारित होती रही है। मसलन, इस प्रकार की खबरों की खुर्खियां भी अब अखबारों के लिए आम-सी हो गया है। सबसे पहले मामला भारतीय जनता पार्टी के दो सांसदों का आया। इसके बाद झारखंड सरकार के एक महत्वपूर्ण मंत्री ने बाकायदा आदेश जारी कर नियमों का माखौल उड़ाया। फिर कांग्रेस की एक महिला विधायक ने लाॅकडाउन के नियमों को बुरी तरह से तोड़ा। उक्त महिला विधायक ने विदेश भ्रमण से लौटने के बाद सीधे अपने पति से मिलने जमशेदपुर चली गयी। उक्त विधायक यहीं पर नहीं रूकी, वह अपने क्षेत्र में जाकर कार्यकर्ताओं के साथ प्रशसनिक अधिकारियों के खिलाफ आन्दोलन भी करने लगी। झारखंड में जनप्रतिनिधियों द्वारा कोविड 19 महामारी कानून तोड़ने का सिलसिला अभी तक नहीं रूका है। अभी हाल ही में जहां प्रदेश की सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी, आरजेडी से जुड़े बिहार सरकार के पूर्ण मंत्री तेज प्रताप यादव ने सारे नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए एक हाॅटल में रूके, वहीं केन्द्र की स...