हताश भूमिपुत्रों का ‘‘हार्दिक आन्दोलन’’

गौतम चौधरी गुजरात में बन रहा है नया राजनीतिक-सामाजिक समिकरण हार्दिक पटेल के नेतृत्व में जो इन दिनों गुजरात में हो रहा है वह पूरे देश में होगा। कोई इसे कुछ भी कह ले लेकिन कुल मिलकार यह युवाओं के बीच का असंतोष है, जो आने वाले समय में बढेगा, घटने वाला नहीं है। लिहाजा यह एक संकेत है, जिसे सरकार और सरकार चलाने वाली संस्था समझ ले, अन्यथा बड़े संकट की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाला आरक्षण के आन्दोलन को इतिहासकार अपने चश्मे से देख रहे हैं और सामाज विज्ञान वालों का अपना नजरिया है। अर्थ जगत के लोग इस आन्दोलन की व्याख्या अपने ढंग से कर रहे हैं और उद्योगपतियों की सोच अलग है। इस आन्दोलन की पृष्ठभूमि पर यदि चर्चा करें तो गुजरात के विकास, या फिर ऐसा कह सकते हैं कि नरेन्द्र भाई मोदी के विकास मॉडल की निर्थकता सामने आने लगी है। इस आलेख में गुजरात के राजनीतिक इतिहास पर भी थोड़ी चर्चा करना चाहूंगा, क्योंकि इतिहास के माध्यम से तथ्यों को सही ढंग से समझा जा सकता है। जानकारों के एक समूह का मानना है कि गुजरात में जातीयता की राजनीति कांग्रेस पार्टी ने प्रारंभ की और...