भारत में तालिबान का समर्थन बहुसंख्यकवादी व समावेशी राष्ट्रवाद पर हमला

गौतम चौधरी एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्र ने हाल ही में असम के दर्जनों मुसलमानों को सोशल मीडिया पर तालिबान समर्थक पोस्ट करने के लिए यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए जाने की खबर प्रकाशित किया। इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गिरफ्तार किए गए लोग में कोई भी अनपढ़नहीं है, बल्कि मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक अखिल भारतीय संगठन के राज्य सचिव शामिल सहित कई स्नातक और चिकित्सा पेशेवर हैं। गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोगों ने तालिबान को एक इस्लामी सेना के रूप में प्रस्तुत किया, जिसे दुनिया भर के मुसलमानों के उद्धारकर्ता के रूप में कार्य करना चाहिए। यह तथ्य निराधार और बचकाना लगता है तथा इन धारणाओं को जन्म देने वाली विभिन्न परिस्थितियों पर विचार करने की आवश्यकता है। इस प्रकार की खोखली मानसिकता न केवल देश के लिए घातक है अपितु उस समाज के लिए भी यह घातक है, जिस समाज की उक्त संगठन रहनुमाई करता है। भारत में मुसलमानों के एक वर्ग के बीच तालिबान समर्थक भावनाओं के पीछे एक प्रमुख कारण भारत के कुछ प्रमुख मौलवियों/संगठनों द्वारा चरमपंथी संगठन की सकारात्मक समीक्षा को जिम्मेदार ठहराया...