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कांग्रेस का संसद में नेता प्रतिपक्ष की मांग, न तो नैतिक, न संवैधानिक

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गौतम चैधरी/अभिषेक शर्मा विगत दिनों अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से बार-बार बयान दिया गया कि सत्तारूढ गठबंधन लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता के तौर पर उनकी पार्टी के किसी नेता को मान्यता प्रदान करे। इसके पीछे कांग्रेस के अंदर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी की अभिजात्य मानसिकता स्पष्ट रूप से देखने को मिली। हालांकि कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता खुलकर संसद में नेता प्रतिपक्ष के लिए सोनिया या राहुल गांधी की वकालत करते नहीं दिखे लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य सोनिया या रहुल को प्रपिक्ष के नेता के रूप में खडा कर सत्ता में एक परिवार की पकड को बनाए रखने में मदद करना ही था। इस मामले में पहले संवैधानिकता का डर पैदा किया गया फिर परंपरा और संसद की मार्यादा एवं गरिमा को हथियार बनाने का प्रयास किया गया। संविधान एवं संसदीय मामलों के जानकारों का कहना है कि प्रतिपक्ष का नेता सचमुच में कोई चीज नहीं होता है लेकिन विधि के द्वारा सन् 1977 में सदन के अंदर नेता प्रतिपक्ष के पद की व्यापक व्यवस्था दी गयी। इन दिनों संसद में एक नई परंपरा चल गयी है वह यह कि प्रतिपक्ष के नेता को केन्द...

पूज्य शंकराचार्य जी का बयान, बवाल और यथार्थ

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गौतम चौधरी विगत दिनों हरिद्वार में कुछ पत्रकारों के बीच शारदा पीठ के पूज्य शंकराचार्य स्वरूपानंद जी महाराज ने कह दिया कि हिन्दू सनातनी धर्म को मानने वाले साई बाबा की पूजा करना बंद कर दें। उन्होंने और कई प्रकार की बातें कही जो साई भक्तों के लिए स्वाभाविक रूप से अपमानजनक था। इस बयान पर साई भक्तों ने पूज्य श्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और जगह-जगह उनके खिलाफ साई भक्त आन्दोलन कर रहे हैं। मैं न तो पूज्य शंकराचार्य जी के बक्तव्य का खंडन कर रहा हूं और न ही साई भक्तों के विश्वास पर कोई टिप्पणी प्रस्तुत कर रहा हूं लेकिन जो बयान पूज्य शंकराचार्य जी ने दिया उसके आधार पर न तो कभी हिन्दू धर्म चला और न ही आने वाले समय में चलेगा। हिन्दुओं की आस्था पर कभी-कभी खुद मैं आसमंजस में पर जाता हूं। मेरी दादी के मैका में एक बडा सा बरगद का पेड था। लोग उसे मलंग बाबा के नाम से जानते थे और उसकी पूजा करते थे। शायद आज भी उस बरगद की पूजा मलंग बाबा के रूप में ही होती होगी। मुझे उन दिनों यह पता नहीं था कि मलंग मुस्लमानों के देवता होते हैं। बिहार के कुछ तिरहुतिया ब्राह्मण और भूमिहार ब्राह्मणों के यहां एक खास प्...

भारतीय भाषाओं की लडाई में हिन्दी की भूमिका

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गौतम चैधरी विगत दिनों केन्द्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा जारी एक अधिसूचना को लेकर समाचार माध्यमों में बावेला खडा करने का प्रयास किया गया। अधिसूचना हिन्दी भाषा को लेकर था। खबर चली कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सभी विभागों और राज्य सरकारों को सूचित किया है कि वे अधिक से अधिक काम-काज हिन्दी में करें। यही नहीं सरकार के द्वारा जारी अधिसूचना के बारे में यह भी बताया और दिखाया गया कि विभागों एवं राज्यों के आधिकारिक इंटरनेट साइट, सामाजिक नेटवर्किंग पृष्ठों पर अधिक से अधिक हिन्दी एवं देवनागरी का उपयोग किया जाये। यह समाचार विभन्न समाचार वाहिनियों पर वाॅयरल होने लगा। कुछ सोशल नेटवर्किंग साइट पर भी इसे गति देने का प्रयास किया गया लेकिन पूरे घटना-क्रम की व्याख्या का कुल लब्बोलुआब कुछ अलग किस्म की सच्चाई वयां करता प्रतीत होता दिखा। कुछ समाचार माध्यमों में खबर यह भी चली कि संभवतः भारतीय जनता पार्टी के बहुमत की सरकार ने अपने हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान वाले सिद्धांत पर काम करते हुए इस प्रकार की अधिसूचना प्रेषित कराई है। इस खबर की सच्चाई के बारे में एक अखबर के संपादकीय अग्रलेख में लेखक पडताल करता दिखा।...

तो अमेरिका के द्वारा प्रयोजित है इराक का गृहयुद्ध ?

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गौतम चैधरी इराक के गृहयुद्ध के कई मायने निकाले जा रहे हैं। प्रेक्षक इस बात से सन्न हैं कि मध्य-पूरव में छोटी-छोटी घटनाओं पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने वाला संयुक्त राज्य अमेरिका इस बार रहस्यमय तरीके से संजीदगी दिखा रहा है। दुनिया की महाशक्ति का स्वांग खडा करने वाला युरापिय संघ चुप्पी साधे हुए है और एशियायी लडाके चीन एवं रूस कुछ भी कहने से कतरा रहा है। जिस प्रकार की खबर इराक से आ रही है उसमें रत्तीभर संदेह नहीं है कि इराक के गृहयुद्ध का प्रभाव संपूर्ण विश्व पर पडेगा। कल ही एक जानकार बता रहे थे कि इस युद्ध का दुष्परिणाम विकासशील देश पर नमारात्मक परने वाला है। इस युद्ध के कारण सोमालियायी लडाके बेहद खतरनाक तरीके से सक्रिय हो जाएंगे और दुनिया भर में तेल पहुंचाने वाला मार्ग इस लडाई के कारण अवरूद्ध होगा। इस गृहयुद्ध के कारण साउदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमिरात, अमन, सीरिया, इरान, कुबैत आदि अप्रत्याशित तरीके से संवेदनशील हो रहा है। इस लडाई के कारण पूरा मध्य-पूरब अस्थिर हो गया है। इस पूरी अस्थिरता का फायदा तेल व्यापारी उठाएंगे और एक बार फिर से अप्रत्याशित तरीके से कच्चे तेल की कीमत में बढोतर...

राजनीति में किस सिद्धांत की बात कर रहे हैं नीतीश ?

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  गौतम चैधरी  भारत के कथित समाजवादी आज चैराहे पर हैं। समाजवादियों को संरक्षण देने वाले और समय-समय पर स्वदेशी सोच के खिलाफ समाजवाद का उपयोग करने वाली सामंती गिरोह को भी इस बार हासिये पर ढकेल दिया गया है। सबसे बडी हार तो भारतीय साम्यवादियों की हुई। देश भर में कुल 10 सीट ही जीत पाये। मैं विगत एक मई के दिन कई समाचार-पत्रों को खंगाल लिया, लेकिन कही साम्यवादियों के लाल झंडे वाला समाचार नहीं मिला। न ही बडे-बडे संपादीक अग्रलेख दिखे जो किसी जमाने में अमूमल समाचार पत्रों की सोभा बढाया करती थी। खैर, हारे के हरिनाम! बडा अजीव लगता है जब खुर्राठस समाजवादी नीतीश कुमार सिद्धांतों की बात करते हैं। मैं उनकी दूरदर्शन प्रस्तुति देख रहा था, नीतीश जी मूल्य और सिद्धांतों की राजनीति की बात कर रहे थे। जब कोई राजनीति में मूल्य और सिद्धांत की बात करता है तो मैं बडा अजीव तरह से संवेदनशील हो जाता हूं। नीतीश कुमार जी की दूरदर्शन प्रस्तुति से कुछ ही देर पहले उन्ही की पार्टी के एक मुस्लिम समाजवादी नेता दूरदर्शन पर शेर सुना रहे थे ः -  ‘‘ हम सच कहेंगे पर चर्चा नहीं होगी,    वे झूठ बोलें...

लोकतंत्र के प्रति बढ रहे अविश्वास का फायदा उठाने के फिराक में हैं माओवादी

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गौतम चैधरी केन्द्र की सरकार को चलाने के लिए पांच साल बाद एक बार फिर से आम चुनाव कराया जा रहा है। पूरे देश में चुनाव आयोग और कई सरकारी, गैर सरकारी संगठनों ने इस बार चुनाव में मतों के प्रतिशत को बढाने के लिए जबरदस्त अभियान भी चलाया है। दावा किया जा रहा है कि उस अभियान का असर चुनाव में मतों के प्रतिशत पर सकारात्मक पडा है, लेकिन जो रूझान आ रहे हैं उससे पता चल रहा है कि देशभर में तमाम अभियानों के बाद भी प्रतिशत मतों में 10 से ज्यादा की बढोतरी नहीं हुई है। चुनाव आयोग और सरकार के प्रयास के बवजूद कई क्षेत्रों में मतदान के प्रतिशत में कमी भी देखी जा रही है। चुनाव आयोग या नौकरशाही की कसावट वाली सरकार इसे जो माने, लेकिन हमे नहीं भूलना चाहिए कि लोकतंत्र में भारत के आम जन की हिस्सेदारी सिमट रही है। इसका फायदा निःसंदेह लोकतंत्र को आईना दिखने वाले संगठन उठाएंगे। इसका असर अब भारत की लोकतांत्रित सत्ता पर बंदूक के शासन को स्थापित करने वाले माओवादी क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। माने या न मानें, धीरे-धीरे ही सही, लेकिन देश में माओवाद के प्रति स्वीकार्यता बढ रही है। देश के घुर माओवाद विरोधी लोगों ...

चंडीगढ का मुकम्मल विकास किया हूं और आगे भी करता रहूंगा-पवन कुमार बंसल

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साक्षात्कार  गौतम चैधरी चंडीगढ के निवर्तमान सांसद, पूर्व केन्द्रीय रेलमंत्री इस बार फिर से चुनाव मैदान में हैं। बंसल संयुक्त प्रगतिशी गठबंधन सरकार में रेलमंत्री रह चुके हैं। आज उनसे व्यक्तिगत संपर्क कर बात की। पवन बंसल चैथी बार चंडीगढ से चुनाव लड रहे हैं। विगत तीन चुनाव वे भारी अंतरों से जीत चुके हैं। पवन बंसल के खिलाफ पहली बार भारतीय जनता पार्टी के कृष्णलाल शर्मा चुनाव लडे लेकिन शर्मा चुनाव हार गये। दूसरी बार बंसल के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने सत्यपाल जैन को चुनाव मैदान में उतारा लेकिन वे भी चुनाव हार गये। तीसरी बार सन् 2009 में एक बार फिर बंसल के खिलाफ भाजपा ने सत्यपात जैन को मैदान में उतारा लेकिन जैर भारी अंतर से चुनाव हारे और बंसल अजेय हो गये। चुनस जीतने के बाद संप्रग-2 में बंसल को केन्द्रीय रेलमंत्रालय का दायित्व सौंपा गया। उन दिनों बंसल बडे प्रभावी ढंग से राजनीतिक उंचाइयों पर चढ रहे थे लेकिन रेलगेट कांड ने बंसल की राजनीतिक गाडी को पंचर कर दिया और वे परेशान हो गये। प्रतिपक्षी पार्टी के लोग तो उनके खिलफ मोर्चा खाला ही अपनी पार्टी के लोग भी कन्नी काटने लगे लेकिन जैसे ...