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महामंदी से निवटने के लिए वैकल्पिक रास्ते की तलाश जरूरी

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Gautam Chaudhary आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है रघुराम राजन की चेतावनी  भारतीय रिजर्व बैंक के गवरनर रघुराम राजन की आशंका और चिंता को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। राजन दुनिया के जाने-माने अर्थशास्त्री हैं और उनके बारे में जानकार बताते हैं कि राजन दुनिया के अर्थ प्रणाली पर अच्छी पकड रखते हैं, इसलिए यदि उन्होंने आशंका जाहिर की है कि दुनिया एक बार फिर से महामंदी की ओर बढ रहा है, तो इसे हमारी सराकर को ही नहीं आम जन को भी गंभीरता से लेना चाहिए। हालांकि मैं अर्थशास्त्र का न तो छात्र रहा हूं और न ही कभी अर्थशास्त्र का गंभीरता से अध्यन किया है, लेकिन मोटे तौर पर मंदी के दंश को समझता हूं। बाजार की मंदी का मतलब, आम तौर पर अमूमन आम लोगों की क्रय शक्ति की कमजोरी से लगाया जाता है। बाजर में उत्पाद तो होता है लेकिन उसके खरीददार नहीं होते। ऐसी परिस्थिति में बाजार कमजोर पड जाता है और कंपनियां घाटे में चली जाती है। बैंकों के दिवाले निकल जाते हैं क्योंकि कंपनियों के द्वारा लिया गया कर्ज बैंक को प्राप्त नहीं हो पाता। कंपनियां दिवालिया हो जाती है। देखते ही देखते मूल्य का ह्रास होने लगता है...

सत्तारूढ हरियाणा भाजपा के कार्यकर्त्ताओं में बढ रहा है असंतोष

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                                                   Gautam Chaudhary "आसन्न स्थानीय निकाय चुनाव पर नकारात्मक असर  की संभावना" हरियाणा भाजपा का आगामी तीन दिनों तक मैराथन बैठक होने वाली है। गत दिन शाम तक प्रदेश के महामंत्री संगठन सुरेश भट्ट रोहतक से चंडीगढ पहुंच गये थे। विश्वस्थ सूत्रों से मिली खबर में बताया गया है कि आज शाम से जो बैठकों का दौर चलेगा वह आगामी कई दिनों तक चलने वाली है। हालांकि इस बात की जानकारी नहीं मिल पायी है कि भाजपा एवं राष्टकृीय स्वयंसेवक संघ विचार परिवार समन्वय की बैठक हुई है या नहीं, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि हरियाणा भाजपा की मैराथन बैठक के बाद, कुछ अनु भवी जमात के लिए खुशखबरी संभव है। वैसे हरियाणा की सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का जनाधार खिसकने और दरकने लगा है। इसका अंदाजा विगत दिनों भाजपा के र...

पूवोत्तर के आतंकी पदचांप को हल्के में न ले भारतीय सत्ता प्रतिष्ठान

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गौतम चौधरी अभी हाल के दिनों में ही मणिपुर के सुदूर पहाडी क्षेत्र में आतंकियों द्वारा घात लगाकर किये गये हमले में भारतीय थल सेना के 18 जवानों की मृत्यु हो गयी। इस घटना में 11 जवानों के घायल हाने की भी खबर है। आतंकियों ने इससे पहले अप्रैल में अरूणाचल प्रदेश के खांसा नामक स्थान पर भारतीय सेना को निशाना बनाया था। उस हमले में भी सेना के चार जवाने मारे गये थे। यही नहीं आतंकियों ने एक बार फिर से असम राइफल के मुख्य शिविर पर हमला किया है। ये तीनों हमले केन्द्र में आई लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार के शासन में किये गये हमले हैं। पूर्वोत्तर में एक के बाद एक हमले के पीछे किसका हाथ है और हमलों में संलिप्त चरमपंथियों की मनोंवृति क्या है, इसपर व्यापक पडताल की जरूरत है। पूर्वोत्तर के परिपेक्ष में देखा जाये तो अभी हाल के महीनों में सेना के खिलाफ आतंकियों का यह दूसरी बडा हमला था। ऐसे तो इस घटना के बाद प्रतिपक्षी कांग्रेस के साथ ही साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और देश के केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक ने बयान जारी किये हैं, लेकिन सबसे गंभीर प्रतिक्रिया केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजू की आ...

भूकम्प पर राजनीति नहींए योजनाओं में शामिल करें भूगोलविदों को

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गौतम चौधरी विगत कुछ दिनों से बृहद हिमालय में लगातार आ रहे भूकम्प के झटकों ने भूगर्भ विज्ञानियों के कान खडे कर दिये हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका से लेकर चीनए रूस तक के वैज्ञानिक इस बात की पडताल में लगे हैं कि आखिर वह कौन सा कारण है जिसने एशियायी आग्नेय क्षेत्र को फिर से भू.संचलन के लिए बाध्य किया है। भूगोल में भूगर्भीय संरचनाओं के बारे में थोडा ही पढा जाता हैए लिहाजा पृथ्वी के अंदर होने वाली गतिविधियों का मुकम्मल विज्ञान भूगर्भ विज्ञान है। अमूमन भूगोल की किताबों में स्थलाकृतियों के बारे में जानकारियां दी गयी है। इन जानकारियों के दौरान भूगोल में थोडा भूमि के अंदर और थोडा भूमि के बाहर की जानकारियां मिल जाती है क्योंकि पृथ्वी के वाह्य भाग पर बनी स्थलाकृतियों पर दोनों तरफ की शक्तियों का प्रभाव पडता है। चूकी भूकम्प पृथ्वी पर बनने वाले कई स्थलाकृतियों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाता है इसलिए भूगोल के विद्यार्थियों को थोडा ही सहीए पर भूकम्प पढना जरूर पडता है। भूकम्प के बारे में जो लिखा और दिखाया जा रहा हैए उससे समाज में कई प्रकार की भ्रांतियां फैल रही हैए इसलिए भूकम्प पर मुकम्मल मिमांशा ...

तो किरण रिजिजू ने क्या गलत कह दिया?

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गौतम चौधरी किरण रिजिजू के गामांस खने वाले बयान पर हाय-तौवा मचा हुआ है। कुछ लोग यह कह रहे हैं कि किरेण ने घोर आपत्तिजनक बात कही है, तो कुछ लोगों का कहना है कि आखिर किरण ने गतल क्या कहा। खना, पीना, पहनना आद के लिए इस देश में कोई कानून नहीं बना हुआ है। दूसरी बात यदि सरकार कानून बनाने की सोचे भी तो वह लोकतंत्र एवं भारतीय संवाधान की मूल अवधारना के खिलाफ होगा। ऐसे में ग्राउंड जीरो पर खडा होकर यदि विचार किया जाये तो दोनों ही तथ्य सही हैं लेकिन जो लोग हिन्दुत्व के नाम पर किरण का विरोध कर रहे हैं उन्हें यह सोचना चाहिए कि आखिर किरण ने ये बात क्यों कही। किरण इस देश के गृह राज्यमंत्री हैं। वे एक ऐसी पार्टी के नेता हैं जो गंभीर नेतृत्वकर्ता के लिए जानी जाती है। मैं व्यक्तिगत रूप से उनसे मिल चुका हूं। वे अनरगल बयानबाजी से अमूमन बचते हैं। ऐसे में किरण का यह कहना कि ‘हां मैं गाय का मांस खाता हूं, मुझे कोई रोकर दिखाए‘! इसके पीछे किरण और भाजपा की कोई न कोई रणनीति जरूर काम कर रही होगी। भाजपा और किरण यह साबित करने में लगे हैं कि जिस प्रकार यह देश कथित रूप से बहुसंस्कृति का देश है, उसी प्रकार भारतीय जन...

अफगानिस्तान में दो महाशक्तियों के बीच पिस रहा भारतीय मिशन

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गौतम चौधरी  इन दिनों अफगानिस्तान में तालिबानी लडाके भारतीय मिशन पर आक्रमण तेज कर दिये हैं। यदि सरसरी निगाह से देखा जाये तो ये आक्रमण तब से तेज हुआए जबसे पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान का गुप्तचर सूचना आदान.प्रदान समझौता हुआ है। अफगानिस्तान में भारतीय मिशनों पर हुए विगत तमाम आक्रमणों के लिए आतंकवादी संगठन तालिबान को ही जिम्मेबार ठहराया गया है। लिहाजा तालिबानियों ने हमारे मिशनों को फिर से क्षति पहुंचाना प्रारंभ कर दिया है। अफगानिस्तान में हमारे मिशनों की सुरक्षा पर प्रश्न खडे होने लगे हैं। हमारे कूटनीतिज्ञों को यह नहीं भूलना चाहिए कि अफगानिस्तान हमारी कूटनीति का अहम डिस्टीनेशन है। अफगानिस्तान के साथ हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा जुडी हुई है। वहां घटने वाली घटनाओं को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। सतही तैर पर देखें तो यही लगता है कि पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान की नजदीकी के कारण भारतीय मिशन पर आक्रमण हो रहे हैंए लेकिन गंभीरता के साथ विचार किया जयेए तो अफगानिस्तान में खेल कुछ और ही चल रहा है। एक तरह से देखें तो अफगानिस्तान या फिर पाकिस्तान केवल सतही और वाह्य खेल का हिस्सा मात्र हैए असली खेल...

भाजपा सरकार का सांस्कृतिक बनाम काॅरपोरेट राष्ट्रवाद का द्वन्द्व

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गौतम चौधरी नरेन्द्र मोदीए जब से केन्द्र सरकार की कमान अपने हाथ में ली है तभी से प्रतिपक्षी उनके उपर आरोप लग रहा है कि उनकी सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारे पर कम कर रही है। यह कितना सत्य है इसपर गंभीरता से पडताल की जरूरत है। लिहाजा मोदी निःसंदेह संघ के स्वयंसेवक हैं। उनका दावा है कि उन्होंने राष्ट्र और संगठन के लिए अपना व्यक्तिगत और परिवारिक जीवन छोड दिया। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं इसलिए उनके उपर इस प्रकार का अरोप स्वाभाविक रूप से चिपकाया जा सकता है। फिर वे जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्ही के समय में सन् 2002 वाला सांप्रदायिक दंगा हुआ। अहमदाबाद के पुरने लोग बताते हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री हितेन्द्र भाई देसाई के बाद यह पहला दंगा था जिसमें मुसल्मानों पर हिन्दू भारी पडा। सन् 2002 के दंगे को लेकर तत्कालीन गुजरात की मोदी सरकार की भूमिका पर सवाल खडे किये गये। प्रतिपक्षियों ने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी की सरकार सांप्रदायिक बहुसंख्यक ध्रुविकरण के लिए खुद दंगा करवाई है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के उपर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे को लागू करने का आरोप...