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उपचुनाव : हेमंत के लिए कितनी चुनौती खड़ी कर पाएगी गुटों में बंटी प्रदेश भाजपा

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गौतम चौधरी  भाजपा नेतृत्व की ओर से बार-बार दावा किया जा रहा है कि बेरमो और दुमका उपचुनाव में उनकी जीत सूनिश्चित है, परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है। ऐसा लग रहा था कि इस उपचुनाव में महागठबंधन के उम्मीदवारों को हेमंत सरकार की असफलताओं और भाजपा के मजबूत संगठन से टकराना पड़ेगा लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा है। मसलन, प्रदेश सरकार की असफलताओं को केन्द्र सरकार की असफलताओं ने ढ़क दिया है और भाजपा के स्थानीय नेतृत्व का अंतरविरोध हेमंत के लिए संजीवनी का काम करने लगा है। खेमों में बटा प्रदेश का भाजपा नेतृत्व न तो हेमंत सरकार के खामियों को उजागर करने में सफल हो रहा है और न ही कोई आन्दोलन ही खड़ा कर पा रहा है। आगामी 03 नवम्बर को झारखंड की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। बेरमो विधानसभा की सीट कांग्रेस के कद्दावर नेता, राजेन्द्र सिंह की मृत्यु के बाद खाली हुई थी, जबकि दुमका की सीट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वेच्छा से छोड़ी है। यह उपचुनाव कई मायने में महत्वपूर्ण है। सबसे पहली बात तो यह है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश की यह पहली अग्नि परीक्षा है। दूसरी बात, इन दोनों विधानस...

विशुद्धा धार्मिक प्रवास हिजरत को आतंकवाद का हथकंडा न बनाया जाय 

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गौतम चौधरी  हिज्राह या हिजरत, हजरत मोहम्मद का अपने अनुयाइयों (सहाबा) के साथ, शहर मक्का से शहर मदीना जिस का पुराना नाम यस्रिब था, को सन् 622 में प्रवास को कहा जाता है। दरअसल, उन दिनों मक्का बेहद अशांत हो गया था और साहब यानी हजरत मोहम्मद साहब को कहीं से यह सूचना मिली कि शहर मक्का में उनकी हत्या कर देने की साजिश हो रही है। यही कारण था कि साहब ने मक्का छोड़ कर यस्रिब (मदीना) प्रवास कर गए। इसी प्रवास को हिजरत के नाम से जाना जाता है। इस प्रवास के दौरान उनके साथ उनके बेहद करीबी माने जाने वाले, जो बाद में खलीफा नियुक्त किए गए, सहाबी अबू बक्र भी थे।  इससे पहले मुसलमानों का पहला प्रवास इथियोपिया के लिए भी हुआ है। कुछ मुस्लिम विद्वान इसे भी हिजरत की संज्ञा देते हैं। यह घटना सन् 613 के आस-पास की बतायी जाती है। हजरत मोहम्मद साहब ने अपने अनुयाइयों से कहा कि मक्का के लोग मुसलमानों को सताने लगे हैं, मक्का में दिन दूभर हो गये हैं, इसलिये इथियोपिया के नेगस, जो ईसाई धर्म के मानने वाले हैं और एक ईश्वर में विश्वास करते हैं, वहां चले जाएं। मोहम्मद साहब के कहने पर कुछ सहाबा यानी मोहम्मद के अनुयायी ...

भारतीय राष्ट्रवाद को आधुनिक ओटोमन और चीनी विस्तारवाद से खतरा

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गौतम चौधरी  दुनिय बहुत तेजी से बदल रही है। दुनिया का कूटनीतिक भूगोल भी बड़ी तेजी से परिवर्तित हो रहा है। सोवियत रूस के पराभव के बाद से लेकर विगत कुछ वर्षों तक संयुक्त राज्य अमेरिका जिस प्रकार पूरी दुनिया को नियंत्रित कर रहा था, अब वह ऐसा नहीं कर पा रहा है। विश्व मंच पर अब नए नए कूटनीतिक खिलाड़ी प्रभावशाली भूमिका निभाने लगे हैं। जहां एक ओर इस्लामिक विश्व को अपने नियंत्रण में लेने के लिए तुर्की, आक्रामक विदेश नीति के साथ प्रस्तुत हुआ है, वहीं दूसरी ओर चीन नई रणनीति के साथ अमेरिका को चुनौती देने लगा है। इधर इजरायल भी अमेरिकी फ्रेम से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। यही नहीं वह स्वतंत्र विदेश नीति के साथ दुनिया को समझने और परखने की कोशिश करने लगा है। हालांकि इस बात को लेकर इजरायल की आलोचना भी हो रही है लेकिन इजरायल इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। मसलन अमेरिकी दादागीरी का दौर समाप्त होता दिख रहा है। पीपल्स रिपब्लिक आॅफ चाइना, रूस के साथ मिलकर जहां एक ओर शंघाई सहयोग संगठन को मजबूत करने में लगा है, वहीं वह भारत, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के साथ मिलकर आर्थिक क्षेत्र में अमेरिकी दादागीरी को संत...

NDA गठबंधन में दरार के कई मायने, LJP ने बिहार की सियासी जंग को बनाया रोचक

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गौतम चौधरी  चुनाव आयोग की घोषणा के बाद बिहार विधानसभा चुनाव का जमीनी जंग प्रारंभ हो गया है। दो महागठबंधनों ने भी लगभग अपनी-अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। एक ओर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन तो दूसरी ओर महागठबंधन अपने-अपने साथी पार्टियों के साथ चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। सीटों को लेकर जो गतिरोध था वह लगभग समाप्त हो चुका है। इस बार वाला बिहार का सियासी जंग इसलिए थोड़ा भिन्न है क्योंकि बहुत दिनों के बाद राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर एकिकृत वामदल चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले वाम पार्टियों का कोई न कोई धरा अपनी मनमानी करता रहा है लेकिन इस बार का बिहार विधानसभा चुनाव वाम गठबंधन की प्रयोगशाला के रूप में उभरकर सामने आया है। वाम दल आगे कितने संगठित रहेंगे यह तो भविष्य बताएगा लेकिन इस बार बिहार चुनाव में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्सवादी-लेनिनवादी से लेकिर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तक इकट्ठे चुनाव लड़ने को मजबूर हैं। मसलन इस बार का बिहार विधानसभा चुनाव वाम दलों के लिए एक प्रयोग है।   यह चुनाव इसलिए भी थोड़ा भिन्न है कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन के पुराने साथी लोक जनशक्ति पार्टी ...

आधुनिक चुनौतियों का सामना करना है तो मदरसा शिक्षा में संशोधन जरुरी 

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हसन जमालपुरी  भारत के मुसलमान दुनिया के समझदार कौमों में से एक हैं। इसके पीछे का कारण इल्म और तजुर्बा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही भारतीय मुसलमानों ने अपने आप को आधुनिकता से जोड़ना प्रारंभ कर दिया था। हालांकि मोगलिया संल्तनत के समय में भारत का जो रूतवा था वह तो अभी प्राप्त नहीं हो पाया है लेकिन इल्म और दिमाग का डंका आज भी दुनिया में बोल रहा है।  चुनांचे,  जब से दुनिया में इस्लामिक कट्टरपंथियों का उभार हुआ है तब से भारत उपमहाद्वीप में भी कुछ इसी प्रकार के चर्चे प्रारंभ हो गए हैं। मदरसा इसका केन्द्र बताया जा रहा है लेकिन आधुनि चुनौतियों का यदि सामना करना है तो मदरसों को बदला होगा और उसे आधुनिक शिक्षा केन्द्र बनाना होगा। हालांकि दीनी शिक्षा भी जरूरती है लेकिन उसके साथ ही साथ आधुनिक शिक्षा का होना उतना ही आवश्यक है।  भारत की आधुनिक शिक्षा प्रणाली में मदरसा के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए बहुत चर्चा हुई है। इसमें कोई शक नहीं है कि भारतीय मदरसा, गरीब मुस्लिम समुदाय के एक बड़े हिस्से को शिक्षित बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है लेकिन आधुनिक सोच और वैश्विक चुनौतियों की समझ...

बिहार विधानसभा चुनाव के साथ जुड़ी है झारखंड की भावी राजनीति, कभी भी हो सकती है घोषणा

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गौतम चौधरी @ वर्तमान बिहार विधानसभा का कार्यकाल पूरा हो रहा है। आगामी दिनों में बिहार विधानसभा का चुनाव होना अब लगभग तय हो गया है। बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही संभवतः झारखंड के दो खाली पड़े विधानसभा का भी उपचुनाव संपन्न कराया जाएगा और इसके परिणाम के बाद शर्तीया तौर पर झारखंड की राजनीति एक बार फिर से करवट लेगी। कोविड संक्रमण काल में भी चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में संलग्न है। सारे सरकारी महकमों को इस काम में लगाया गया है। इधर जो खबर आ रही है उससे अब यह लगने लगा है कि बिहार विधानसभा और झारखंड के दो विधानसभाओं का उपचुनाव 26 अक्टूबर. से लेकर 10 नवंबर के बीच करा लिया जाएगा।  चुनाव आयोग ने इस बात के संकेत भी दे दिए हैं। इसलिए अब कभी भी बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा हो सकती है। झारखंड में विधानसभा की दो खाली सीटों दुमका और बेरमो उपचुनाव के मतदान 26 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच कराने की तैयारी की जा रही है। चुनाव आयोग ने इसके संकेत दिए हैं। इस हिसाब से हफ्ते भर बाद कभी भी उपचुनाव के तारीखों की घोषणा हो सकती है। यह घोषणा बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही होगी। दुमका सीट मुख...

झारखंड : खूंटी के 70 गावों में दुहरा रहे आरा-केरम के प्रयोग

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गौतम चौधरी  झारखंड का ग्रामीण परिवेस बड़ी तेजी से बदल रहा है। हालांकि अभी भी बड़ी-बड़ी चुनौतियां हैं लेकिन इन चुनौतियों पर विकास अब भारी पड़ने लगा है। जिन क्षेत्रों में कल तक माओवादियों के बूट, बंदूक व बम-गोलों की चर्चा हाती थी, वहां अब ग्रामीण चैपालों पर ग्राम सभा बैठती है और ग्रामीण विकास की बातें हो रही है। विगत दिनों ऐसे ही झारखंड के कुछ गांवों को देखने का मौका मिला। मैं तोरपा के अलंकेल गांव को देखने गया था। वहां मुझे हेमवंती देवी से मुलाकात हुई। हेमवंती, ग्रामीण विकास विभाग की ओर से संचालित दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना के तहत आशा दीदी के रूप में यहां प्रतिनियुक्त हैं। हेमवंती ने जो अपना अनुभव बताया वह किसी आश्चर्य से कम नहीं है। हेमवंती ने बताया, जब वह अलंकेल गांव आयी थी तो ग्रामीण महुआ से दारू बनाने में व्यस्त रहते थे लेकिन धीरे-धीरे दो-तीन महीनों में चित्र बदलने लगा। ग्रामीणों ने हेमवंती दीदी को अपना गुरू माल लिया। ग्राम सभाओं की नियमित बैठकें होने लगी। गांव में साफ-सफाई का माहौल बना। महिलाएं इस काम में बढ़-चढ कर हिस्सा लेने लगी। अब सवाल यह उठता है कि यह ग्रामीण विकास और पर...