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बिहार में इन 10 कारणों से प्रभावी और अपरिहार्य बने हुए हैं नीतीश कुमार

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गौतम चौधरी नीतीश कुमार एक बार फिर से अजेय और अपरिहार्य होकर उभरे हैं। नीतीश के बारे में यही कहा जाता है कि वे चुनौतियों को अवसर में बदलने वाले नेताओं में से हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थिति में अपने आप को खड़ा किया है। लालू यादव के पराभव के बाद बिहार में दो ताकतों का उदय हुआ, जिसमें से एक नीतीश कुमार हैं और दूसरे रामविलास पासवान। रामविलास की विरासत बहुत ज्यादा मजबूत नहीं हो पायी लेकिन अपनी चतुराई और राजनीतिक कौषल के बदौलत नीतीश कुमार बिहार की राजनीति को अपने चारो तरफ नचाते रहे हैं। आइए जानते हैं नीतीश कुमार की मजबूती के 10 कारण: - पहला, नीतीश कुमार में विकास को मुद्दा बनाने वाले नेता की छवि है। जेडी (यू) और नीतीश कुमार बिहार में अभी भी एक बड़ी ताकत हैं और उनको दरकिनार कर किसी के लिए भी सरकार चलाना आसान नहीं है। यही वजह है कि कोई जोखिम लिए बगैर बीजेपी ने भी नीतीश को ही एनडीए का नेता मानकर चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव परिणाम में आधे के आसपास सीट रहने के बाद भी भाजपा नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाई। इससे यह साबित हो गया है कि नीतीष कुमार बिहार की राजनीति के लिए अपरिहार्य हैं। पिछले कुछ ...

पेरिस की घटना वैश्विक आतंकवाद का हिस्सा, केरल में भी तो काटे थे शिक्षक के हाथ

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गौतम चौधरी प्रत्येक मानव की अभिव्यक्ति मायने रखता है। चाहे वो विचारों से हो या शारीरिक कृत्यों के रूप में हो, या हिंसा के रूप में। कभी-कभी इन दोनों के बीच अंतर-विश्वसनीयता सर्वोपरि और पवित्र होती है। विचार अगर एक उचित और निहित तरीके से नियोजित किया जाता है, तो उससे हिंसा होना तय है। हाल ही में घटी पेरिस की घटना हमें सिखाती है कि सामाजिक वर्गों के बीच मुख्य रूप से धर्मों के साथ जुड़े भावनाओं के लिए सहिष्णुता और सम्मान बढ़ाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से, दुनिया भर के मुसलमानों को उनके सामने आने वाली बढ़ती चुनौतियों को समझने की जरूरत है। इसलिए, उनके द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई को उनके बीच रहने वाले समुदायों के मानकों के अनुसार देखा, समझा और परखा जाना चाहिए। फ्रांस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ धार्मिक उकसावों (जैसे पैगंबर की अवमानना) का लंबा इतिहास रहा है। वहां के मुसलमानों को इस्लामी शिक्षा और पैगंबर मोहम्मद की बातों को ध्यान में रखते हुए अधिक सामंजस्यपूर्ण और सहिष्णु होने की आवश्यकता है। इस बात को समझने की अधिक आवश्यकता है कि हिंसा के व्यक...

सरना धर्म कोड पर भाजपा की रहस्यमय चुप्पी से उठ रहे कई सवाल

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गौतम चौधरी आगामी जनगणना में आदि वासियों के लिए सरना धर्म कोड की वकालत राज्य में बड़ा मुद्दा बनना जा रहा है। राज्य की महागठबंधन सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस बाबत प्रस्ताव पास करा दिया है। इस प्रस्ताव को अब केंद्र को भेजने की तैयारी हो रही है। विपक्ष में बैठी भाजपा और आजसू की भी इसमें सहमति है। इस पूरे मामले का अहम पक्ष यह है कि इस प्रस्ताव पर विशेष सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने रहस्यमय तरीके से चुप्पी साधे रखी। भाजपा के विधायकों ने सरकार के पक्ष का समर्थन कर दिया और प्रस्ताव पर बहस कराने की भी मांग नहीं की। सवाल यह उठता है कि आखिर भाजपा अपने पारंपरिक नीति से समझौता क्यों कर रही है। क्या भाजपा डरी हुई है , या फिर सरना धर्म कोड पर भाजपा की चुप्पी के और कारण हैं ? इसकी मिमांशा जरूरी है। बता दें कि इस मामले में भाजपा की अलग राय रही है। भाजपा लगातार से यह सवाल पूछती रही है कि जब पहले से जनसंख्या में यह व्यवस्था लागू थी तो 1961 में उसे हटाया क्यों ? भाजपा यह भी कहती रही है कि क्या धर्मातरित आदि वासियों को इससे इतर रखा जाएगा ? ये तमाम सवाल भारतीय जनता पार्टी की नीतिगत चिंतन म...

झारखंड का वित्तीय संकट : राजनीतिक फायदे के फिराक में सत्ता व विपक्ष

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गौतम चौधरी  इन दिनों झारखंड के सियासी गलियारों में राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर गजब की हलचल है। सत्ता और विपक्ष दोनों इस संकट को अपने-अपने हितों के अनुसार परिभाषित कर रहे हैं और राजनीति की रोटी सेक रहे हैं। इस मामले को लेकर हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन की सरकार ने केन्द्र सरकार पर कई आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर प्रतिपक्षी पार्टी भाजपा ने भी सरकार पर निशाना साधा है और साफ शब्दों में कहा है कि जब राज्य सरकार वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है तो फिर मुख्यमंत्री के लिए लग्जरी गाड़ी खरीदने की क्या जरूरत थी। हालांकि इस बयान का भी सत्ता पक्ष की ओर से जवाब आया है लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए न तो सत्तापक्ष कुछ करने की स्थिति में और न ही विपक्षी पार्टी भाजपा केन्द्र सरकार पर दबाव बनाती दिख रही है, उलटे राज्य सरकार को ही कठघरे में खड़ी कर रही है।  राज्य की वित्तीय स्थिति सचमुच बहुत खराब है। यह भी सही है कि इससे उबरने के लिए राज्य को केन्द्रीय मदद की भरपूर जरूरत है। इसके बिना कुछ भी संभव नहीं है। जैसे ही हेमंत सोरेन ने राज्य की कमान संभाली उन्होंने वित्तीय स...

उपचुनाव : हेमंत के लिए कितनी चुनौती खड़ी कर पाएगी गुटों में बंटी प्रदेश भाजपा

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गौतम चौधरी  भाजपा नेतृत्व की ओर से बार-बार दावा किया जा रहा है कि बेरमो और दुमका उपचुनाव में उनकी जीत सूनिश्चित है, परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है। ऐसा लग रहा था कि इस उपचुनाव में महागठबंधन के उम्मीदवारों को हेमंत सरकार की असफलताओं और भाजपा के मजबूत संगठन से टकराना पड़ेगा लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा है। मसलन, प्रदेश सरकार की असफलताओं को केन्द्र सरकार की असफलताओं ने ढ़क दिया है और भाजपा के स्थानीय नेतृत्व का अंतरविरोध हेमंत के लिए संजीवनी का काम करने लगा है। खेमों में बटा प्रदेश का भाजपा नेतृत्व न तो हेमंत सरकार के खामियों को उजागर करने में सफल हो रहा है और न ही कोई आन्दोलन ही खड़ा कर पा रहा है। आगामी 03 नवम्बर को झारखंड की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। बेरमो विधानसभा की सीट कांग्रेस के कद्दावर नेता, राजेन्द्र सिंह की मृत्यु के बाद खाली हुई थी, जबकि दुमका की सीट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वेच्छा से छोड़ी है। यह उपचुनाव कई मायने में महत्वपूर्ण है। सबसे पहली बात तो यह है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश की यह पहली अग्नि परीक्षा है। दूसरी बात, इन दोनों विधानस...

विशुद्धा धार्मिक प्रवास हिजरत को आतंकवाद का हथकंडा न बनाया जाय 

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गौतम चौधरी  हिज्राह या हिजरत, हजरत मोहम्मद का अपने अनुयाइयों (सहाबा) के साथ, शहर मक्का से शहर मदीना जिस का पुराना नाम यस्रिब था, को सन् 622 में प्रवास को कहा जाता है। दरअसल, उन दिनों मक्का बेहद अशांत हो गया था और साहब यानी हजरत मोहम्मद साहब को कहीं से यह सूचना मिली कि शहर मक्का में उनकी हत्या कर देने की साजिश हो रही है। यही कारण था कि साहब ने मक्का छोड़ कर यस्रिब (मदीना) प्रवास कर गए। इसी प्रवास को हिजरत के नाम से जाना जाता है। इस प्रवास के दौरान उनके साथ उनके बेहद करीबी माने जाने वाले, जो बाद में खलीफा नियुक्त किए गए, सहाबी अबू बक्र भी थे।  इससे पहले मुसलमानों का पहला प्रवास इथियोपिया के लिए भी हुआ है। कुछ मुस्लिम विद्वान इसे भी हिजरत की संज्ञा देते हैं। यह घटना सन् 613 के आस-पास की बतायी जाती है। हजरत मोहम्मद साहब ने अपने अनुयाइयों से कहा कि मक्का के लोग मुसलमानों को सताने लगे हैं, मक्का में दिन दूभर हो गये हैं, इसलिये इथियोपिया के नेगस, जो ईसाई धर्म के मानने वाले हैं और एक ईश्वर में विश्वास करते हैं, वहां चले जाएं। मोहम्मद साहब के कहने पर कुछ सहाबा यानी मोहम्मद के अनुयायी ...