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पाकिस्तान की तुलना में बेहतर जीवन जी रहे हैं भारतीय मुसलमान

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हसन जमालपुरी जब कभी भारतीय मुसलमानों के आर्थिक, सामाजिक परिप्रेक्ष्य की बात की जाती है तो उसकी तुलना स्वाभाविक रूप से पाकिस्तानी मुसलमानों के साथ की जाती है। स्वाभाविक भी है। क्योंकि सांस्कृतिक और धार्मिक आजादी के नाम पर ही कुछ मुस्लिम नेताओं ने पाकिस्तान की मांग की और मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में वह तबका पाकिस्तान चला गया। चुनांचे पाकिस्तान में भारत से गए मुसलमानों को मोहाजिर कहा जाता है। समय बीता परिस्थितियां बदली और आज पाकिस्तान में बसने वाले ये मुहाजिर अपने आप को दुखी और ठगा महसूस कर रहे हैं। उनकी तुलना में भारतीय मुसलमान कहीं आगे हैं। 1947 में, जब पाकिस्तान को भारी रक्त पात के तहत भारत से अलग किया  गया था, सिंधियों ने पाकिस्तान को चुना, जबकि भारत से बड़ी संख्या में उर्दू बोलने वाले मुस्लिमों ने सिंध प्रांत में बसना पसंद किया। सिंधी हिंदुओं, जिनको भारत भागने के लिए मजबूर किया गया उनके द्वारा खाली की गई संपत्ति को प्रवासि भारतीय मुस्लिम के लिए आवंटित कर दिया गया। इन्हीं जिन्हें मुसलमानों को पाकिस्तान में मोहाजिर के नाम से जाना जाता था। दरअसल, मोहजिर शब्द का इस्तेमाल...

हेमंत शासन का एक साल, इश्तिहारों के जश्न में जमीनी हकीकत की मीमांसा

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Gautam Chaudhary हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन की झारखंड सरकार ने अभी हाल ही में एक वर्ष पूरा किया है। अपने वर्षगांठ के मौके पर सरकार ने छोटा-सा जश्न भी मनाया। स्वाभाविक  रूप से जश्न बनता भी है। इस मौके पर सरकार के मुखिया ने बड़े जोरदार तरीके से आपनी पीठ थपथपाई और अपने द्वारा एक साल में किए गए कार्यों को लोगों के सामने रखा। उपलब्धियों के निक्षेप बड़े-बड़े होर्डिंग-इश्तिहारों के रूप में आपको पूरे प्रदेश भर में दिखेंगे। सड़कों पर, सार्वजनिक स्थानों पर, मसलन चैक-चैराहों पर लगे होर्डिंगों में सरकार ने अपनी एक साल की उपलब्धियों को मुकम्मल तरीके से स्थान दिलवाने की कोशिश की है। जिन उपलब्धियों की सरकारी अपने प्रचारों में जगह दी है, उसमें से अधिकतर का जमीन पर कोई वजूद नहीं दिखता लेकिन इससे सरकार की उपलब्धियां कम नहीं होती है।  वैसे किसी सरकार के लिए एक साल का समय कोई ज्यादा नहीं होता है और तरंत इसकी समीक्षा करना भी ठीक नहीं है लेकिन जब सरकार खुद अपनी ओर से इश्तेहार दे रही है तो समीक्षा करना स्वाभाविक हो जाता है। इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि हेमंत की सरकार ने कोविड-19 जैसी वैश्व...

कोविड 19 वैक्सीन के खिलाफ फैलाई जा रही अफ़वाह से सावधान रहें

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गौतम चौधरी  जब पूरी मानवता कोविद 19 महामारी के कारण अनिश्चितता की स्थिति में है और इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में जान माल की हानि हो रही है, ऐसे में कुछ मौक़ापरस्त और मानवता के दुश्मन दुष्प्रचार में लगे हैं। सोशली मीडिया का उपयोग कर पहले तो कोविड के वैक्सीन पर सवाल खड़ा किया गया और जब इससे मन नहीं भरा तो अब वैक्सीन में सूअर की चरबी होने का अफ़वाह फैलाने लगे हैं। दुनिया की कई वैक्सीन निर्माता कंपनियों ने कोविड टीका बनाने का दावा किया है। फ़ाइज़र, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका जैसी वैक्सीन बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने सूअर की चरबी वाले अफ़वाह पर सफाई भी दी है। कंपनियों के प्रबंधन की ओर से जारी जानकारी में बताया गया है कि उन्होंने अपनी वैक्सीन में जिलेटिन का इस्तेमाल नहीं किया है। मानव इतिहास में कोरोना वायरस दुनिया में सबसे खतरनाक आपदा और विनाशकारी बीमारी के रूप में सामने आया है। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने सैकड़ों रातों की नींद हराम कर, इस खतरनाक बीमारी के प्रभाव को कम करने की क्षमता वाले नए टीके विकसित किए हैं। ऐसे में इस टीके का हमें स्वागत करना चाहिए और मानवता के रक्षक वैज्ञानिकों का धन...

तुर्की के नव खिलाफत आन्दोलन को भारत में स्थापित करने की फ़िराक में PFI

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रजनी राणा चौधरी  कॉमरेड अभिमन्यु माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की छात्र इकाई के प्रभावशाली नेता थे। अभी हाल ही में पोपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया की छात्र शाखा कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया नामक कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन ने उनकी हत्या दी। दरअसल, केरल की साम्यवादी सरकार ने अभिमन्यु के नाम पर एक स्मारक भवन का निर्माण कराया है। जिसमें पुस्तकालय के साथ साथ गरीब पिछड़े तबके के छात्रों को रहने की भी व्यवस्था है। यहां पिछड़े पृष्ठभूमि से आनेवाले छात्र रहकर अपनी पढ़ाई भी कर सकते हैं। इस खबर को पढ़ने के बाद पोपुलर फ्रंट के बारे में जाने की जिज्ञासा किसी को भी हो सकती है। इन दिनों जो खबरें छन कर सामने आ रही है उसमें इस संगठन का तार अब तुर्की के तानाशास से भी जुड़ने लगा है। पोपुलर फ्रंड आॅफ इंडिया को पीएफआई के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण भारत के बाद यह संगठन बड़ी तेजी से उत्तर भारत में अपना पांव पसारना प्रारंभ कर दिया है। यह संगठन इन दिनों इस्लाम के नाम पर लोगों को भड़काने में अहम भूमिका निभा रहा है। पश्चिमी विचारक एमजे क्रोन कहते हैं कि सभ्य होने में दोष यह है कि यह हमारे बीच के असभ्य को स्वतंत्रता और समानता के...

झारखंड की शांति में खलल डालने की कोशिश, फिर से संगठित होने लगे माओवादी

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गौतम चौधरी   झारखंड में एक बार फिर से माओवादी चरमपंथी सिर उठाने लगे हैं। तथ्य व आंकड़े बताते हैं कि 2019 की अपेक्षा अगस्त 2020 तक उग्रवाद व नक्सल प्रभावित इलाके में चरमपंथी वारदातों में बढ़ोतरी हुई है। झारखंड में अगस्त 2019 तक 85 नक्सल और उग्रवादी घटनाएँ हुई थीं, जबकि अगस्त 2020 तक 86 घटनाएँ हुई। अगस्त 2020 के बाद राज्य में माओवादी घटनाओं में अप्रत्याशित तरीके से इज़ाफा हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अगस्त 2020 तक नक्सल और उग्रवादी घटनाएँ तब बढ़ी, जब पुलिस ने सबसे अधिक अभियान और एलआरपी चलाया। यह खतरनाक संकेत हैं और ये आंकड़े साबित करने के लिए काफी है कि माओवादियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। आंकड़ों और तथ्यों की मिमांशा से साफ परिलक्षित होता है कि पुलिस अभियान और सक्रियता में कोई कमी नहीं है लेकिन चरमपंथियों पर जो दबाव पड़ना चाहिए उसमें कमी दिखई दे रही है। हाल के महीनों में राज्य में सक्रिय अलग-अलग नक्सली संगठनों ने लेवी के लिए दहशत फैलाने के उद्देश्य से वाहनों में आगजनी और फ़ायरिंग की घटनाओं को अंजाम दिया है। उग्रपंथियों के मनोबल में बढ़ोतरी का अंदाजा इसी बात से...

जिहाद विशुद्ध इस्लमिक धार्मिक कृत्य है, इसे आतंकवाद से ना जोड़ें

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गौतम चौधरी   जिहाद, इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी शिक्षाओं में से एक है और इसे महानता, महिमा और संप्रभुता प्राप्त करने का एक माध्यम माना जाता है। उस आधार पर, जिहाद हर मुसलमान के लिए अनिवार्य कृत्य है, जो कयामत के दिन तक चलेगा। जिहाद, अरबी शब्द जहदा से लिया गया है जिसका अर्थ है पूरी ईमानदारी से काम करना। इस्लामिक अवधारणाओं में जिहाद को एक नियम के रूप में माना जाता है, जिसे मुसलमानों द्वारा पालन किया जाना चाहिए क्योंकि यह पुष्टि की जाती है कि पवित्र कुरान में विशेष रूप से विभिन्न सूरह में इकतालीस (41) गुना का उल्लेख है। यानी 41 जिहादों का उल्लेख है। मसलन, 8 बार मेका सूरह (पैगंबर मोहम्मद पर मक्का में सूरह में खुलासा हुआ) और मदनियाह सूरह में 33 बार (हिज्रत के बाद मदीना में सामने आए सूरह)। इस दृष्टि से जिहाद मुसलमानों के लिए एक बुनियादी अवधारणा है।  प्रचलित धारणा के विपरीत, इस्लाम में जिहाद केवल गैर-मुसलमानों के खिलाफ अंधाधुंध निर्देशित हिंसा का कार्य नहीं है। यह उन सभी संघर्षों को दिया गया नाम है, जो एक मुसलमान को सभी बुराइयों के खिलाफ शुरू करनी चाहिए, चाहे वह किसी भी रू...

अल्पसंख्यकों को भारतीय संविधान पर भरोसा रखना चाहिए, यह सबकी सुरक्षा की देता है गारंटी

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गौतम  चौधरी   अभी हाल ही में अल्पसंख्यक अधिकार दिवस मनाया गया। 18 दिसंबर को प्रत्येक वर्ष पूरी दुनिया में अल्पसंख्यक अधिकार दिवस मनाया जाता है। भारत में भी बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक निवास करते हैं। भारतीय संविधान के अनुसार यहां भाषा और धर्म को अल्पसंख्यक का आधार माना गया है। उस दृष्टि से भारत में मुसलमान, ईसाई, सिख, बौध, जैन और पारसी समुदाय के लोगों को अल्पयंख्यक की श्रेणी में रखा गया है। भारतीय संविधान में भारत के हर नागरिक को समान दृष्टि से देखा गया है और संविधान निर्माताओं ने इस बात का विशेष ध्यान रखा था कि देश में आगे चलकर कोई भेदभाव ना रहे और सभी मिलजुल कर रहें, इसलिए संविधान में अल्पसंख्यक और पिछड़े का विशेष ध्यान रखा गया है। भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए दुनिया भर में अलग पहचान रखने वाला देश है। यहां अल्पसंख्यक समुदायों को अलग से भी कई प्रकार के अधिकार दिए गए हैं जो बहुसंख्यकों को प्राप्त नहीं है। यह भारतीय संविधान की विशेषता के साथ ही साथ अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।  दरअसल, संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 18 दिसम्बर, 1992 को एक घोषणा पारित...