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धार्मिक साम्राज्य की तुलना में बहुधार्मिक लोकतांत्रिक राष्ट्र जनता के प्रति ज्यादा जवाबदेह

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कलीमुल्ला खान  इन दिनों पाकिस्तान में एक नया इस्लामिक धार्मिक आन्दोलन चल रहा है। इस आन्दोलन को चलाने वाले तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के नाम से पूरे पाकिस्तान में नई इस्लामिक आन्दोलन खड़ा करने की बात कर रहे हैं। वैसे पाकिस्तान को दुनिया भर में इस्लामिक राष्ट्र के रूप में पहचान मिली हुई है लेकिन पाकिस्तान के एक मौलवी, खादिम हुसैन रिजवी साहब ने इस आन्दोलन को प्रारंभ किया। रिजवी साहब का मानना है कि पाकिस्तान केवल कहने के लिए इस्लामिक राष्ट्र है, यहां इस्लाम के सही वसूल कायम नहीं हो पाए हैं और उनकी पार्टी की जब सरकार आएगी तो पाकिस्तान को सचमुच का इस्लामिक राष्ट्र बनाया जाएगा। वैसे रिजवी साहब की विगत दिनों रहस्यमय तरीके से मौत हो गयी। मौलाना रिजवी साहब की मौत में पाकिस्तानी गुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका बतायी जा रही है। रिजवी साहब की तहर ही पाकिस्तान के कई मौलवी समय समय पर अपने तरीके से इस्लाम को परिभाषित करते हैं और उसके आधार पर देश के प्रशासनिक ढ़ांचे को ढ़ालने की बात करते हैं। अफगानिस्तान में भी इसी प्रकार का एक आन्दोलन प्रारंभ हुआ, उसे तालिबान के नाम से जाना जाता है। तालिबानी लड़ाके जिसके...

पाकिस्तानी इस्लामिक परिभाषा और अत्याचार का शिकार रहा है बांग्लादेश

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रजनी राणा  पिछली सदी दक्षिण एशिया के इतिहास में सबसे हिंसक माना जना चाहिए। कई हिंसक टकरावों में से एक, 1971 का बांग्लादेश मुक्ति युद्ध है, जो एक सशस्त्र संघर्ष था। बांग्लादेश युद्ध, बंगाली राष्ट्रवादियों के उदय से शुरू हुआ था। यह मुक्ति संघर्ष बांग्लादेश के गठन तक चलता रहा। बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा था और बार-बार सैन तख्तापलत के कारण शोषण और दमन का शिकार होता रहा। जिसके परिणामस्वरूप 1971 और उसके आसपास बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ। यद्यपि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ बांग्लादेश को इस युद्ध से स्वतंत्रता मिली परन्तु इसके मानव जीवन के रूप में होने वाली छती की भरपाई करना संभव नहीं है। 25 मार्च 1971 की शाम को पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के खिलाफ पश्चिम पाकिस्तान में स्थित पाकिस्तानी सैन्य टुकड़ी को ऑपरेशन सर्चलाइट के तहत राष्ट्रवादी बंगाली नागरिकों, बुद्धिजीवियों, छात्रों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और विभिन्न प्रसासनिक संस्था से जुड़े लोगों को विशेष रूप से पुलिस और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान राइफल्स के सैनिक बल और व्यक्तियों की हत्या को अंजाम दिया गया। ढाका एक ही शाम में मौत की घाटी में बदल गया। ...

दक्षिण एशिया के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है भारत-बांग्लादेश दोस्ती

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गौतम चौधरी भारत हमेशा से अपने सभी पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध और सह अस्तित्व के सिद्धांत में विश्वास करता रहा है। हालांकि, हर किसी को खुश करना संभव नहीं है, खासकर तब जब पड़ोसी (पाकिस्तान) की रुचि अनैतिक और असामाजिक कार्यों में हो। पड़ोस में बसने वाले देशों में पाकिस्तान और चीन को छोड़ अन्य सभी के साथ बेहद मधुर संबंध हैं। खासकर बांग्लादेश उन पड़ोसी देशों में से है, जिसका संबंध अस्तित्व में आने के बाद से ही मधुर रहा है। हालांकि भारत के साथ बांग्लादेश का छोटा-मोटा विवाद भी चलता रहता है लेकिन दोनों देश के कूटनीतिक संबंध इतने बेहतर हैं कि उन विवादों का द्विपक्षीय संबंध पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। बांग्लादेश और भारत समय-समय पर सामाजिक, सांस्कृतिक, सभ्यता और आर्थिक लिंक एक दूसरे के साथ साझा करते हैं। जानकारी में रहे कि बांग्लादेशी स्वतंत्रता संघर्ष को भारत ने समर्थन दिया था। यही नहीं भारत पहला देश था जिसने 1971 में बांग्लादेश को मान्यता दी और उसके साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। तब से बांग्लादेश, भारत को एक दोस्त, रक्षक और बाजार के रूप में देखता रहा है। बांग्लादेश के साथ बहुआयामी संबंधों क...

पाकिस्तान की तुलना में बेहतर जीवन जी रहे हैं भारतीय मुसलमान

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हसन जमालपुरी जब कभी भारतीय मुसलमानों के आर्थिक, सामाजिक परिप्रेक्ष्य की बात की जाती है तो उसकी तुलना स्वाभाविक रूप से पाकिस्तानी मुसलमानों के साथ की जाती है। स्वाभाविक भी है। क्योंकि सांस्कृतिक और धार्मिक आजादी के नाम पर ही कुछ मुस्लिम नेताओं ने पाकिस्तान की मांग की और मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में वह तबका पाकिस्तान चला गया। चुनांचे पाकिस्तान में भारत से गए मुसलमानों को मोहाजिर कहा जाता है। समय बीता परिस्थितियां बदली और आज पाकिस्तान में बसने वाले ये मुहाजिर अपने आप को दुखी और ठगा महसूस कर रहे हैं। उनकी तुलना में भारतीय मुसलमान कहीं आगे हैं। 1947 में, जब पाकिस्तान को भारी रक्त पात के तहत भारत से अलग किया  गया था, सिंधियों ने पाकिस्तान को चुना, जबकि भारत से बड़ी संख्या में उर्दू बोलने वाले मुस्लिमों ने सिंध प्रांत में बसना पसंद किया। सिंधी हिंदुओं, जिनको भारत भागने के लिए मजबूर किया गया उनके द्वारा खाली की गई संपत्ति को प्रवासि भारतीय मुस्लिम के लिए आवंटित कर दिया गया। इन्हीं जिन्हें मुसलमानों को पाकिस्तान में मोहाजिर के नाम से जाना जाता था। दरअसल, मोहजिर शब्द का इस्तेमाल...

हेमंत शासन का एक साल, इश्तिहारों के जश्न में जमीनी हकीकत की मीमांसा

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Gautam Chaudhary हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन की झारखंड सरकार ने अभी हाल ही में एक वर्ष पूरा किया है। अपने वर्षगांठ के मौके पर सरकार ने छोटा-सा जश्न भी मनाया। स्वाभाविक  रूप से जश्न बनता भी है। इस मौके पर सरकार के मुखिया ने बड़े जोरदार तरीके से आपनी पीठ थपथपाई और अपने द्वारा एक साल में किए गए कार्यों को लोगों के सामने रखा। उपलब्धियों के निक्षेप बड़े-बड़े होर्डिंग-इश्तिहारों के रूप में आपको पूरे प्रदेश भर में दिखेंगे। सड़कों पर, सार्वजनिक स्थानों पर, मसलन चैक-चैराहों पर लगे होर्डिंगों में सरकार ने अपनी एक साल की उपलब्धियों को मुकम्मल तरीके से स्थान दिलवाने की कोशिश की है। जिन उपलब्धियों की सरकारी अपने प्रचारों में जगह दी है, उसमें से अधिकतर का जमीन पर कोई वजूद नहीं दिखता लेकिन इससे सरकार की उपलब्धियां कम नहीं होती है।  वैसे किसी सरकार के लिए एक साल का समय कोई ज्यादा नहीं होता है और तरंत इसकी समीक्षा करना भी ठीक नहीं है लेकिन जब सरकार खुद अपनी ओर से इश्तेहार दे रही है तो समीक्षा करना स्वाभाविक हो जाता है। इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि हेमंत की सरकार ने कोविड-19 जैसी वैश्व...

कोविड 19 वैक्सीन के खिलाफ फैलाई जा रही अफ़वाह से सावधान रहें

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गौतम चौधरी  जब पूरी मानवता कोविद 19 महामारी के कारण अनिश्चितता की स्थिति में है और इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में जान माल की हानि हो रही है, ऐसे में कुछ मौक़ापरस्त और मानवता के दुश्मन दुष्प्रचार में लगे हैं। सोशली मीडिया का उपयोग कर पहले तो कोविड के वैक्सीन पर सवाल खड़ा किया गया और जब इससे मन नहीं भरा तो अब वैक्सीन में सूअर की चरबी होने का अफ़वाह फैलाने लगे हैं। दुनिया की कई वैक्सीन निर्माता कंपनियों ने कोविड टीका बनाने का दावा किया है। फ़ाइज़र, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका जैसी वैक्सीन बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने सूअर की चरबी वाले अफ़वाह पर सफाई भी दी है। कंपनियों के प्रबंधन की ओर से जारी जानकारी में बताया गया है कि उन्होंने अपनी वैक्सीन में जिलेटिन का इस्तेमाल नहीं किया है। मानव इतिहास में कोरोना वायरस दुनिया में सबसे खतरनाक आपदा और विनाशकारी बीमारी के रूप में सामने आया है। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने सैकड़ों रातों की नींद हराम कर, इस खतरनाक बीमारी के प्रभाव को कम करने की क्षमता वाले नए टीके विकसित किए हैं। ऐसे में इस टीके का हमें स्वागत करना चाहिए और मानवता के रक्षक वैज्ञानिकों का धन...

तुर्की के नव खिलाफत आन्दोलन को भारत में स्थापित करने की फ़िराक में PFI

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रजनी राणा चौधरी  कॉमरेड अभिमन्यु माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की छात्र इकाई के प्रभावशाली नेता थे। अभी हाल ही में पोपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया की छात्र शाखा कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया नामक कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन ने उनकी हत्या दी। दरअसल, केरल की साम्यवादी सरकार ने अभिमन्यु के नाम पर एक स्मारक भवन का निर्माण कराया है। जिसमें पुस्तकालय के साथ साथ गरीब पिछड़े तबके के छात्रों को रहने की भी व्यवस्था है। यहां पिछड़े पृष्ठभूमि से आनेवाले छात्र रहकर अपनी पढ़ाई भी कर सकते हैं। इस खबर को पढ़ने के बाद पोपुलर फ्रंट के बारे में जाने की जिज्ञासा किसी को भी हो सकती है। इन दिनों जो खबरें छन कर सामने आ रही है उसमें इस संगठन का तार अब तुर्की के तानाशास से भी जुड़ने लगा है। पोपुलर फ्रंड आॅफ इंडिया को पीएफआई के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण भारत के बाद यह संगठन बड़ी तेजी से उत्तर भारत में अपना पांव पसारना प्रारंभ कर दिया है। यह संगठन इन दिनों इस्लाम के नाम पर लोगों को भड़काने में अहम भूमिका निभा रहा है। पश्चिमी विचारक एमजे क्रोन कहते हैं कि सभ्य होने में दोष यह है कि यह हमारे बीच के असभ्य को स्वतंत्रता और समानता के...