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चुनावी मोड में हरियाणा, बिछने लगी रणनीतिक विसात

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गौतम चौधरी कायदे से हरियाणा विधानसभा का चुनाव तो लोकसभा चुनाव के बाद होना है। इस बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि सत्तारूढ दल हरियाणा विधानसभा चुनाव भी लोकसभा के साथ ही करा लेना चाहता है। तकज़् कई दिए जा रहे हैं लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हो पायी है। चुनाव जब भी हो लेकिन राजनीतिक दलों ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की तैयारी प्रारंभ कर दी है। सरसरी तौर पर देखें तो प्रदेश में तीन राजनीतिक शक्तियां हैं। एक भारतीय जनता पार्टी, जो फिलहाल सत्तारूढ है और अभी भी अन्य दलों की तुलना में संगठित और मजबूत दिख रही है। दूसरी पार्टी कांग्रेस है। फिलहाल प्रदेश में कांग्रेस साफ तौर पर कमजोर दिख रही है। कमजोर इसलिए नहीं कि उसके पास कार्यकपताओं की कमी है, या फिर वह जनाधार के मामले मे कमजोर है, अपितु कांग्रेस कमजोर इसलिए दिख रही है कि इसके नेता आपसे में ही एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चे पर डटे हैं।  खैर, तीसरी राजनीतिक शक्ति समाजवादी पृष्टभूमि की पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चैटाला के नेतृत्व वाली इंडियन नेशनल लोक दल है। पहले तो यह दल बेहद प्रभावशाली दिख रहा था।...

यदि इस्लाम को बचाना है तो हमें नकारात्मकता को हतोत्साहित करना होगा

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हसन जमालपुरी  मैं इस्लाम के बारे में सकारात्मक सोच रखने वालों में से हूं। इसलिए मैं इस्लाम की समारामकता से ही आपको परिचय कराउंगा। मसलन इसलाम में जो भी नकारात्मक दिख रहा है वह इस्लाम का अंग है ही नहीं जैसे आप फतवों के बारे में सुनते होंगे। इस्लाम में फतवों का विधान है लेकिन आजकल जिस प्रकार के नकारात्मक फतवे जारी किए जा रहे हैं उसका हमारे यहां कोई स्थान नहीं है। चुनांचे इस्लाम में जीवन को जीने का पूरा कायदा दिया गया है। यह मुस्लिमों को भाईचारे, शांति और पड़ोसियों के प्रति प्यार-मुहब्बत रखने का उपदेश देता है। इस्लाम अपने पड़ोसियों के मजहब पर विचार किए बिना उनके साथ आपसी रिश्ते और सहयोग रखने पर जोर देता है। साथ ही पड़ोसियों से किसी भी रूप में घ्रिणा करने या नुकसान पहुंचाने के लिए भी मना करता है। एक मुस्लिम होने के नाते यह स्वीकार करना चाहिए कि सभी मनुष्य आदम और हौवा के संतानें हैं, इसलिए सभी आपस में बराबर हैं। कुरान मजीद में भी यह कहा गया है कि अल्ला की खिदमत करों और उसके साथ किसी और को खड़ा ना करो। अपने माता-पिता, रिश्तेदारों, अनाथों, जरूरतमंदों, पड़ोसियों, अजनबिनयों, अपने साथियो...

अब राम के वन गमन पथ पर पंगा, मंत्रालय और एडवाइजरी कमेटी आमने-सामने

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गौतम चौधरी  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक राम सर्किक का विकास है। यह भारत के लिए ही नहीं दुनिया भर में बसे हिन्दुओं के लिए धार्मिक आस्था की बात है। भारतीय राष्ट्रवाद और इस देश के लिए बेहद अच्छी योजना नरेन्द्र भाई की सरकार लेकर आ रहे हैं लेकिन इस योजना के साथ जो छेड़-छाड़ की जा रह है वह हिन्दुओं के आस्था पर प्रहार से कम नहीं है। विगत दिनों हमारे प्रधानमंत्री नेपाल के प्रवास पर गए थे। वहां उन्होंने माता जानकी के जनकपुर स्थित मंदिर का भी दर्शन किया। जानकी मंदिर में गूंजती घंटी प्रधानमंत्री मोदी के नेपाल में होने की गवाही दे रही थी। सियाराममय माहौल में रामायण सर्किट की चर्चा भी बेहद स्वाभाविक था।  आपको बता दें कि साल 2016 में भारत सरकार ने रामायण सर्किट की घोषणा की थी। दो साल बीत गए हैं लेकिन इस सर्किट पर अभी तक कुछ भी नहीं हो पाया है। इस मामले पर अपने दूरदर्शन के लिए रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ट पत्रकार अमिताभ बताते हैं कि सरकार ने राम सर्किट निर्माण के लिए बाकायदा एक एक कमीटी बनाई है। उसके अध्यक्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं विश्व हिन्दू पर...

असहिष्णुमा की बात करने वाले इस देश को समझ नहीं पाए

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हसन जमालपुरी  कुछ लोग भारत के हिन्दू और मुसलमानों को नाहक में बड़गला रहे हैं। मीडिया के द्वारा बराबर प्रचार किया जाता है कि भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है लेकिन मेरा मानना है कि जबतक इस देश में समझदार लोग जिंदा हैं और भारत का संविधान प्रभावी है तबतक इस देश में असहिष्णुता किसी कीमत पर नहीं आ सकती है।  आज मैं आपके सामने कुछ उदाहरण प्रस्तुत करता हूं जो इस देश में पनप रहे मौका परस्तों की आंखें खोल देगा। चुनांचे एक हिन्दू परिवार द्वारा मुस्लिम लड़के का पालन-पोषण किया गया। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है। हकीकत है कि थाने, महाराष्ट्र स्थित बेडेकर काॅलेज की प्रिंसिपल डाॅ. सुचित्रा नायक ने अब्दुल शेख नामक ऐसे अनाथ मुस्लिम लड़के को गोद लिया, जिसने उनके काॅलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दाखिला लिया था। दाखिले के दौरान उससे बातचीत करने पर डाॅ. सुचित्रा को उसकी स्थिति के बारे में पता चला और उसका भविष्य सवारने के लिए उन्होंने उसे अपनाने का मन बनाया। ऐसा करने से पहले उन्होंने अपने पति श्री नायक तथा परिवार के अन्य सदस्यों से भी परामर्श किया, जिन्होंने उनके इस प्रयास के प्रति अपन...

अपनी घिसी-पिटी विदेश नीति को बदले भारत

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गौतम  चौधरी  जब से केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनी है तब से कई क्षेत्रों में नीतियां बदली-बदली-सी दिख रही है। बदलना भी चाहिए लेकिन बदली हुई नीति स्पष्ट भी होनी चाहिए। मसलन मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश मंत्रालय की नीति की दिशा बिल्कुल अस्पष्ट है। बहुत जांच परख के बाद यही लगता है कि वर्तमान भारतीय विदेश मंत्रालय की नीति दो बिन्दुओं पर केन्द्रित हो गयी है। एक पाकिस्तान विरोध और दूसरा अमेरिका-इजरायत सामरिक गोलबंदी में अपना हित ढुंढना। इन दो सिद्धांतों पर हमारी विदेश नीति जाकर अटक गयी है। इसे अटकना नहीं चाहिए था। मुझे लगता है कि यह भटकाव है। इससे भविष्य के भारतीय राष्ट्रवाद को व्यापक क्षति उठानी पड़ सकती है। यदि गौर से देखें तों पाकिस्तान बड़ी तेजी से बदल रहा है। उसे अब लग गया है कि इस्लामिक आतंकवाद को साथ लेकर जनरल जिया वाली नीति से उसे बड़ा घाटा हुआ है। वह अब इस नीति से अपना पिंड छुड़ाना चाहता है। पाकिस्तान को इस नीति से अपना पिंड छुड़ाना ही होगा। यदि वह इसी सिद्धांत पर चलता रहेगा तो पाकिस्तान का कई भागों में टूटना तय है। फिर बड़े पैमाने पर पाकिस्तान ...

प्रगतिशील उलेमाओं ने भारतीय मुस्लिम महिलाओं में नए दौर की सोच पैदा की

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कलीमुला खान  हर दौर में मजहब समाज को एक-दूसरे से जोड़कर रखने का जरिया रहा है। दौर-ए-जदीद में कोई उतार-चढ़ाव आए फिर-भी मजहब अपना एक अलग ही मुकाम है लेकिन यह भी सच्चाई है कि मजहब के नाम पर उठने वाले और तहरीके चलाने वालों में बहुत से ऐसे थे जिन्होंने या तो अपने मफादात यानी फायदे के खातिर जान-बूझकर मजहबी तालिमात को मनमाने ढंग से पेश किया और बड़ तादाद में सादा दिल अवाम उनका शिकार हुई लेकिन एक कीमती पहलू यह भी है कि ऐसी सूरत-ए-हाल का मुकाबला करने के लिए बड़े-बड़े विद्वान और उलेमा सामने आए और उन्होंने मजहबी तालिमात की असली हकीकत पेश की और आज यह सच्चाई समाज, इंसान और इंसानियत की तरक्की का सबब बनी हुई है। यह सबकुछ दिगर मजाहिब के साथ-साथ इस्लाम के मानने वालों में भी हुआ क्योंकि चूकि इस्लाम में कभी भी दौर-ए-जदीद के किसी भ्ज्ञी सही तरीके को नहीं नकारा और जब इस बात को सही तरीके से उलेमाओं व दानीश्वरों ने पेश किया तो इसका फायदा भी मिला और कुरान की असली तालिम को खुद मुस्लिम ख्वातीन भी काफी हद तक समझ चुकी है। अब तो खुद मर्द भी अपनी बहन बेटियों को उंची तालिम दिलाने में मददगार साबित हो रहे हैं। ...

चित-परिचित राजनीतिक औजार से बिहार फतह करने के फिराक में नीतीश

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गौतम चौधरी  विगत दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर में किसी ने पूर्व महापौर की हत्या कर दी। हत्या क्यों की गयी, इसके पीछे किसका हाथ है, स्पष्ट नहीं है लेकिन जो बिहार पुलिस बिना किसी तहकीकात के, तहरीर के आधार पर राजस्थान से आरोपी पत्रकार को पकड़कर बिहार के जेल में बंद कर देती है, उस पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं। मसलन पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है।  इस हत्या को लेकर न तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कोई बयान आया और न ही भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा कोटे से बनाए गए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की कोई संवेदना-संदेश आया। हां जूनियर मोदी ने यह जरूर कहा कि हम बिहार के अपराधियों से विनम्र निवेदन करते हैं कि कृपया पितृपक्ष में अपराध न करें। मुझे लगता है कि सुशील मोदी ने यह बयान जारी कर यह साबित कर दिया कि अपराध पर नियंत्रण करना बिहार सरकार के बस की बात नहीं है। यह एक प्रकार का समझौता है और जिस प्रकार आतंवादियों से सरकार युद्धविराम समझौते के बाद कुछ दिनों के लिए हथियार छोड़ने की अपील करती है उसी प्रकार उप मुख्यमंत्री प्रदेश के अपराधियों से अपील कर रहे हैं। मतलब साफ...